भाषा संगम
भारत एक विशाल और विविधताओं से भरा देश है। यहाँ हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, बोली, वेशभूषा, खान-पान और परंपराएँ बदल जाती हैं। यही वजह है कि भारत को “भाषाओं का गुलदस्ता” कहा जाता है। हमारे संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं, जिनमें से प्रत्येक भाषा अपने आप में एक संस्कृति, इतिहास और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है।
इसी अद्भुत भाषाई विविधता को सम्मान देने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने एक उत्कृष्ट पहल शुरू की है, जिसका नाम है “भाषा संगम”। यह कार्यक्रम एक भारत श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत चलाया जाता है।
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⭐ भाषा संगम की अवधारणा
भाषा संगम का अर्थ है—भाषाओं का मिलन।
यह कार्यक्रम बच्चों को विभिन्न भारतीय भाषाओं से परिचित कराने के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रतिदिन किसी एक भारतीय भाषा के कुछ सरल वाक्य सिखाए जाते हैं, जिनमें अभिवादन, परिचय, धन्यवाद, क्षमा और दैनिक इस्तेमाल के छोटे-छोटे वाक्य शामिल होते हैं।
इसका उद्देश्य भाषा को पढ़ाना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सम्मान और समझ उत्पन्न करना है, ताकि वे भारत की भाषाई समृद्धि को महसूस कर सकें।
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⭐ भाषा संगम के उद्देश्य
1. भारत की भाषाई विविधता का परिचय देना
विद्यार्थियों को यह बताना कि भारत की हर भाषा मूल्यवान है और हर भाषा का सम्मान होना चाहिए।
2. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना
भिन्न भाषाओं को समझने से बच्चों में आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है।
3. विद्यार्थियों में भाषाई कौशल का विकास
नई भाषाओं के शब्द जानकर बच्चे भाषाई रूप से अधिक समृद्ध बनते हैं।
4. संस्कृतियों का आदान-प्रदान बढ़ाना
भाषा किसी संस्कृति की आत्मा होती है। नई भाषाएँ सीखकर बच्चे विविध संस्कृतियों को भी जान पाते हैं।
5. आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल बढ़ाना
नई भाषाओं में संवाद के छोटे-छोटे प्रयास बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।
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⭐ विद्यालयों में भाषा संगम कैसे मनाया जाता है?
भाषा संगम के दौरान विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जैसे—
✔ • प्रतिदिन एक नई भाषा के वाक्य सीखना
जैसे तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली, कन्नड़ आदि भाषाओं में अभिवादन।
✔ • भाषा संगम दीवार/बोर्ड
जहाँ सभी भाषाओं के वाक्य पोस्टर के रूप में प्रदर्शित किए जाते हैं।
✔ • समूह गतिविधियाँ
बच्चों द्वारा अलग-अलग भाषाओं में बोलना, संवाद करना, कविता पढ़ना।
✔ • सांस्कृतिक कार्यक्रम
किसी भाषा से जुड़े लोकगीत, नृत्य या परंपरा का प्रदर्शन।
✔ • भाषाई क्विज़ और प्रतियोगिताएँ
जिससे बच्चों में उत्साह बढ़ता है।
✔ • सुबह की सभा में दैनिक भाषा परिचय
जहाँ छात्र मंच पर उस दिन की भाषा के वाक्य बोलते हैं।
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⭐ भाषा संगम का महत्व
1. भाषाई सद्भाव बढ़ाता है
यह कार्यक्रम बच्चों को सिखाता है कि किसी भी भाषा को बड़ा या छोटा नहीं समझना चाहिए।
2. एकता में विविधता का अनुभव
जब बच्चे विभिन्न भाषाएँ सुनते और सीखते हैं, तो वे समझते हैं कि विविधता ही भारत की ताकत है।
3. आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण क्षमता में वृद्धि
मंच पर बोलने का अवसर मिलने से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
4. संचार कौशल में सुधार
विभिन्न भाषाओं के शब्द जानने से उनका भाषा ज्ञान और शब्द भंडार बढ़ता है।
5. सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता
बच्चे भाषाओं के माध्यम से विभिन्न राज्यों और समुदायों की संस्कृति से परिचित होते हैं।
6. सकारात्मक और समावेशी वातावरण
स्कूल में आपसी सम्मान, सहयोग और दोस्ती का माहौल मजबूत होता है।
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⭐ भाषा संगम से बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव:
बच्चे नई चीजें सीखने में अधिक रुचि लेते हैं।
उनके मन में जिज्ञासा और सीखने की भावना बढ़ती है।
बच्चों की रचनात्मकता, विचार शक्ति और संवेदनशीलता विकसित होती है।
वे भारत के अन्य राज्यों, संस्कृतियों और परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव अपनाते हैं।
नई भाषाओं को सीखकर वे अधिक आत्मविश्वासी बनते हैं और संवाद कौशल में सुधार आता है।
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