Tuesday, December 23, 2025

 

MERRY CHRISTMAS


🎄 क्रिसमस डे क्यों मनाया जाता है?

क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है।
यह दिन ईसाई धर्म के प्रमुख भगवान – प्रभु यीशु मसीह (Jesus Christ) के जन्मदिन के रूप में पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया जाता है।
⭐ क्रिसमस का महत्व

क्रिसमस का महत्व कई कारणों से बहुत बड़ा है:
 1. प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश

यीशु मसीह ने प्रेम, दया, करुणा और दूसरों की मदद करने का संदेश दिया।
क्रिसमस इन मूल्यों को अपनाने का दिन है।
 2. मानवता की सेवा का प्रतीक

Jesus ने कहा था –
“दूसरों की मदद करो, वही सच्ची पूजा है।”

क्रिसमस लोगों को गरीबों, कमजोरों और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा देता है।
 3. खुशी और उत्सव का त्योहार

इस दिन घरों में सजावट, क्रिसमस ट्री, केक, उपहार, रोशनी आदि से उत्सव का माहौल बनता है।

 4. परमात्मा के प्रेम का एहसास
कहानी के अनुसार, यीशु का जन्म मानवता को पाप और दुख से मुक्त करने के लिए हुआ था।
इसलिए यह दिन भगवान के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
📜 क्रिसमस के पीछे की कहानी (Jesus Christ Birth Story)

1. मरियम और जोसेफ की यात्रा

यीशु मसीह की माता मरियम (Mary) और उनके पति जोसेफ बेतलहम (Bethlehem) नामक स्थान की यात्रा पर थे।
उस समय उन्हें रुकने के लिए कोई जगह नहीं मिली।

2. अस्तबल में जन्म

रात के समय मरियम को प्रसव पीड़ा हुई।
कोई कमरा न मिलने के कारण,
यीशु मसीह का जन्म एक छोटे से अस्तबल  में हुआ।

3. स्वर्गदूत का संदेश

एक स्वर्गदूत (Angel) ने चरवाहों को यह बताया कि
“आज भगवान का पुत्र पैदा हुआ है, वह दुनिया को प्रेम और शांति का संदेश देगा।”

4. तीन ज्ञानी पुरुषों की यात्रा

दूर देश से आए तीन ज्ञानी पुरुष (Three Wise Men / Magi)
एक चमकते सितारे का पीछा करते हुए अस्तबल तक पहुँचे और
सोना, लोबान और गंधरस के रूप में उपहार दिए।
यह भगवान के सम्मान का प्रतीक था।

5. यीशु का जीवन

बड़े होकर यीशु ने:

गरीबों की मदद की

बीमारों का इलाज किया

लोगों को प्रेम और क्षमा का मार्ग सिखाया

उनके उपदेश आज भी दुनिया को मार्ग दिखाते हैं।

🎁 क्रिसमस से क्या सीख मिलती है?

1. प्रेम

2. क्षमा

3. समानता

4. दया

5. एकता

6. दूसरों की मदद




Friday, December 19, 2025

श्रीनिवास रामानुजन

 

श्रीनिवास रामानुजन – संक्षिप्त जीवनी (हिंदी)

श्रीनिवास रामानुजन (22 दिसंबर 1887 – 26 अप्रैल 1920) भारत के महान गणितज्ञों में से एक थे। उन्होंने गणित के क्षेत्र में बिना औपचारिक शिक्षा के असाधारण योगदान दिया। उनका कार्य आज भी विश्वभर के गणितज्ञों को प्रेरित करता है।

रामानुजन का जन्म इरोड, तमिलनाडु में हुआ था और उनका पालन-पोषण कुंभकोणम में हुआ। बचपन से ही उन्हें गणित में गहरी रुचि थी। वे जटिल गणितीय प्रश्नों को बहुत आसानी से हल कर लेते थे। उन्होंने अधिकतर ज्ञान स्वअध्ययन से प्राप्त किया।

आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हुई, लेकिन उन्होंने गणित का अध्ययन नहीं छोड़ा। वर्ष 1913 में उन्होंने अपने गणितीय सूत्रों को एक पत्र के माध्यम से प्रसिद्ध ब्रिटिश गणितज्ञ जी. एच. हार्डी को भेजा। हार्डी रामानुजन की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुए और उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय आमंत्रित किया।

कैम्ब्रिज में रहते हुए रामानुजन ने संख्या सिद्धांत, अनंत श्रेणियाँ और सतत भिन्नों पर महत्वपूर्ण कार्य किया। वर्ष 1918 में वे रॉयल सोसाइटी के फेलो बने और उसी वर्ष ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज के भी फेलो चुने गए।

स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे भारत लौट आए और अल्प आयु में ही उनका निधन हो गया। मात्र 32 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया, लेकिन उनके गणितीय सूत्र आज भी शोध का विषय हैं।

श्रीनिवास रामानुजन भारतीय प्रतिभा, परिश्रम और आत्मविश्वास का अद्भुत उदाहरण हैं।

| 1. When was Srinivasa Ramanujan born?

 a) 21 December 1887 b) 22 December 1887 c) 22 December 1888 d) 21 December 1888 

2. Ramanujan’s mother’s name was……………..

 a) Janakiammal b) Krishnammal c) Komalathammal d) Kamalammal

 3. Whose book influenced Ramanujan during his childhood?

 a) Isaac Newton b) G.S Carr c) Swami Vivekananda d) G.H. Hardy

 4. Name the street where his house was located? 

a) Sri Govindasami Sannidhi Street b) Sri Sarangapani Sannidhi Street c) Sri Gopalasami Street d) Sri 

Dhandhayudhapani Street

 5. On which date the announcement entitled ‘A missing boy’ appeared in ‘The Hindu’ paper?

 a) 6 September 1905 b) 5 September 1905 c) 2 October 1905 d) 22 December 1905

 6. When did Ramanujan marry Janaki?

 a) 1910 July 4 b) 1909 July 14 c) 1909 July 4 d) 1910 July 14 

7. In which journal and year were the first research paper of Ramanujan published? 

a) Journal of IMS, 1911 b) Journal of Indian Academy, 1912 c) Journal of LMS, 1909 d) Journal of IMS, 1912 

8. In which company Ramanujan got an appointment as an accountant? 

a) Madras Shipyard b) Madras Port Trust c) Madras Company d) Madras Talkies Ltd 

9. When did Ramanujan write his historic letter to G.H. Hardy?

 a) January 16, 1913 b) January 10, 1913 c) January 16, 1912 d) January 10, 1912 

10. Name the book authored by G.H. Hardy. 

a) A Mathematician’s Apology b) The Divergent Series c) How to solve it d) Introduction August 2022 




 

Monday, December 15, 2025

 

केंद्रीय विद्यालय संगठन स्थापना दिवस











केंद्रीय विद्यालय संगठन स्थापना दिवस (15 दिसंबर) 

केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) क्या है?

केंद्रीय विद्यालय संगठन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत चलने वाली एक स्वायत्त संस्था है, जो देश-भर में केंद्रीय विद्यालय (KV) स्कूलों का संचालन करती है।
इन विद्यालयों की स्थापना मुख्यतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निरंतर शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी, ताकि ट्रांसफर होने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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स्थापना दिवस कब मनाया जाता है?

केंद्रीय विद्यालय संगठन का स्थापना दिवस हर साल 15 दिसंबर को मनाया जाता है।

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KVS की स्थापना कब और क्यों हुई?

✔ स्थापना वर्ष: 1963

✔ स्थापित करने वाले: भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय

✔ मुख्य उद्देश्य:

1. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों को समान और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना।
(विशेषकर सेना, अर्धसैनिक बल, रेलवे, रक्षा क्षेत्रों आदि में कार्यरत कर्मचारियों के लिए)


2. विभिन्न राज्यों में बार-बार स्थानांतरण के बावजूद बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना।


3. राष्ट्रीय स्तर पर समान पाठ्यक्रम और समान शिक्षा प्रणाली प्रदान करना।


4. देश में शिक्षा के स्तर को एकरूप और आधुनिक बनाना।


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KVS की विशेषताएँ

⭐ 1. समान पाठ्यक्रम

देश के सभी केंद्रीय विद्यालयों में CBSE आधारित एक ही पाठ्यक्रम चलता है।

⭐ 2. उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा

अनुभवी शिक्षकों और उत्कृष्ट शिक्षण विधियों के कारण KV देश के बेहतरीन स्कूलों में गिने जाते हैं।

⭐ 3. बच्चों के समग्र विकास पर जोर

खेल, योग, संगीत, कला, स्काउट-गाइड, कंप्यूटर शिक्षा आदि पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

⭐ 4. ट्रांसफर होने पर आसान प्रवेश

एक KV से दूसरे KV में छात्र का प्रवेश बहुत सरल प्रक्रिया के तहत होता है।

⭐ 5. सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

कम फीस में उच्च स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।

⭐ 6. देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना

सभी KV में "जय हिंद" का प्रयोग, प्रार्थना, संस्कार, अनुशासन और गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता पर जोर।

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स्थापना दिवस क्यों मनाया जाता है?

✔ संस्था की उपलब्धियों और विकास को याद करने हेतु

✔ छात्रों में KV की परंपराओं व मूल्यों के प्रति गर्व भाव उत्पन्न करने हेतु

✔ शिक्षा के क्षेत्र में KVS के योगदान का सम्मान करने हेतु

✔ विद्यार्थियों में अनुशासन, एकता और सेवाभाव को बढ़ावा देने हेतु
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स्थापना दिवस पर क्या-क्या कार्यक्रम होते हैं?

विशेष प्रार्थना सभा

भाषण, कविता, निबंध

सांस्कृतिक कार्यक्रम

स्काउट-गाइड गतिविधियाँ

चित्रकला और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता

शपथ ग्रहण (समानता, अनुशासन और सेवा की भावना)

विद्यालय की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण

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केंद्रीय विद्यालय संगठन का महत्व

⭐ राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना

देश के किसी भी राज्य में KV में पढ़कर बच्चे एकता को समझते और अपनाते हैं।

⭐ बहु-भाषिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान

एक ही कक्षा में अलग-अलग राज्यों और समुदायों के बच्चे साथ पढ़ते हैं।

⭐ भविष्य के नागरिकों का निर्माण

कला, खेल, शिक्षा और संस्कार का संतुलित वातावरण।

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Monday, December 8, 2025

 

मानव अधिकार दिवस





मानव अधिकार दिवस क्या है?
मानव अधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1948 में बनाए गए मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा पत्र (Universal Declaration of Human Rights – UDHR) को अपनाने की याद में मनाया जाता है। इस घोषणा पत्र में हर व्यक्ति को मिलने वाले मूलभूत अधिकारों का वर्णन किया गया है।
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मानव अधिकार दिवस क्यों मनाया जाता है?

मानव अधिकार दिवस मनाने के मुख्य उद्देश्य हैं:

1. हर व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना

हर व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म, जाति, भाषा, रंग, लिंग, देश या स्थिति का हो—उसे समान अधिकार मिलें।

2. मानवता, समानता और न्याय का संदेश देना

समाज में न्याय और बराबरी की भावना को मजबूत करना।

3. भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना

लिंग भेदभाव, नस्लवाद, उत्पीड़न, हिंसा और शोषण को रोकना।

4. सरकारों और संस्थाओं को जिम्मेदारी का एहसास कराना

ताकि वे लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कानून लागू करें।

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मानव अधिकार दिवस मनाने के कारण

दुनिया में कहीं भी मानव अधिकारों का उल्लंघन न हो।

गरीब, कमजोर, बच्चों और महिलाओं को न्याय मिले।

मानव तस्करी, बाल मजदूरी और हिंसा जैसे अपराधों को रोका जा सके।

लोगों को स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा मिले।

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मानव अधिकार दिवस से क्या जागरूकता फैलती है?

✔ मानव अधिकार क्या हैं, यह समझ बढ़ती है

लोग अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझते हैं।

✔ सभी के प्रति सम्मान और सहानुभूति बढ़ती है

समाज में भाईचारा और समानता बढ़ती है।

✔ अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत मिलती है

लोग किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ बोलने का साहस पाते हैं।

✔ महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर जोर

उनके हितों की रक्षा के लिए अभियान चलाए जाते हैं।

✔ कानून और मानव अधिकार आयोग की भूमिका समझना

लोग जान पाते हैं कि उनके अधिकारों की रक्षा किन संस्थाओं द्वारा की जाती है।

Thursday, December 4, 2025

 

भाषा संगम


भारत एक विशाल और विविधताओं से भरा देश है। यहाँ हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, बोली, वेशभूषा, खान-पान और परंपराएँ बदल जाती हैं। यही वजह है कि भारत को “भाषाओं का गुलदस्ता” कहा जाता है। हमारे संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं, जिनमें से प्रत्येक भाषा अपने आप में एक संस्कृति, इतिहास और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है।

इसी अद्भुत भाषाई विविधता को सम्मान देने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने एक उत्कृष्ट पहल शुरू की है, जिसका नाम है “भाषा संगम”। यह कार्यक्रम एक भारत श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत चलाया जाता है।
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 भाषा संगम की अवधारणा

भाषा संगम का अर्थ है—भाषाओं का मिलन।
यह कार्यक्रम बच्चों को विभिन्न भारतीय भाषाओं से परिचित कराने के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रतिदिन किसी एक भारतीय भाषा के कुछ सरल वाक्य सिखाए जाते हैं, जिनमें अभिवादन, परिचय, धन्यवाद, क्षमा और दैनिक इस्तेमाल के छोटे-छोटे वाक्य शामिल होते हैं।

इसका उद्देश्य भाषा को पढ़ाना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सम्मान और समझ उत्पन्न करना है, ताकि वे भारत की भाषाई समृद्धि को महसूस कर सकें।
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⭐ भाषा संगम के उद्देश्य

1. भारत की भाषाई विविधता का परिचय देना

विद्यार्थियों को यह बताना कि भारत की हर भाषा मूल्यवान है और हर भाषा का सम्मान होना चाहिए।

2. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना

भिन्न भाषाओं को समझने से बच्चों में आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है।

3. विद्यार्थियों में भाषाई कौशल का विकास

नई भाषाओं के शब्द जानकर बच्चे भाषाई रूप से अधिक समृद्ध बनते हैं।

4. संस्कृतियों का आदान-प्रदान बढ़ाना

भाषा किसी संस्कृति की आत्मा होती है। नई भाषाएँ सीखकर बच्चे विविध संस्कृतियों को भी जान पाते हैं।

5. आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल बढ़ाना

नई भाषाओं में संवाद के छोटे-छोटे प्रयास बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।


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⭐ विद्यालयों में भाषा संगम कैसे मनाया जाता है?

भाषा संगम के दौरान विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जैसे—

✔ • प्रतिदिन एक नई भाषा के वाक्य सीखना

जैसे तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली, कन्नड़ आदि भाषाओं में अभिवादन।

✔ • भाषा संगम दीवार/बोर्ड

जहाँ सभी भाषाओं के वाक्य पोस्टर के रूप में प्रदर्शित किए जाते हैं।

✔ • समूह गतिविधियाँ

बच्चों द्वारा अलग-अलग भाषाओं में बोलना, संवाद करना, कविता पढ़ना।

✔ • सांस्कृतिक कार्यक्रम

किसी भाषा से जुड़े लोकगीत, नृत्य या परंपरा का प्रदर्शन।

✔ • भाषाई क्विज़ और प्रतियोगिताएँ

जिससे बच्चों में उत्साह बढ़ता है।

✔ • सुबह की सभा में दैनिक भाषा परिचय

जहाँ छात्र मंच पर उस दिन की भाषा के वाक्य बोलते हैं।


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⭐ भाषा संगम का महत्व

1. भाषाई सद्भाव बढ़ाता है

यह कार्यक्रम बच्चों को सिखाता है कि किसी भी भाषा को बड़ा या छोटा नहीं समझना चाहिए।

2. एकता में विविधता का अनुभव

जब बच्चे विभिन्न भाषाएँ सुनते और सीखते हैं, तो वे समझते हैं कि विविधता ही भारत की ताकत है।

3. आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण क्षमता में वृद्धि

मंच पर बोलने का अवसर मिलने से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है।

4. संचार कौशल में सुधार

विभिन्न भाषाओं के शब्द जानने से उनका भाषा ज्ञान और शब्द भंडार बढ़ता है।

5. सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता

बच्चे भाषाओं के माध्यम से विभिन्न राज्यों और समुदायों की संस्कृति से परिचित होते हैं।

6. सकारात्मक और समावेशी वातावरण

स्कूल में आपसी सम्मान, सहयोग और दोस्ती का माहौल मजबूत होता है।

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⭐ भाषा संगम से बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव:

बच्चे नई चीजें सीखने में अधिक रुचि लेते हैं।

उनके मन में जिज्ञासा और सीखने की भावना बढ़ती है।

बच्चों की रचनात्मकता, विचार शक्ति और संवेदनशीलता विकसित होती है।

वे भारत के अन्य राज्यों, संस्कृतियों और परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव अपनाते हैं।

नई भाषाओं को सीखकर वे अधिक आत्मविश्वासी बनते हैं और संवाद कौशल में सुधार आता है।

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