Sunday, November 30, 2025

 वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day)


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🌍वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day)
हर साल 1 दिसम्बर को मनाया जाता है। यह दिन एचआईवी/एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने, संक्रमित लोगों के साथ सहानुभूति दिखाने और इस बीमारी से लड़ने के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

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वर्ल्ड एड्स डे क्यों मनाया जाता है?

लोगों में एचआईवी/एड्स के प्रति सही जानकारी पहुँचाने के लिए।

बीमारी से जुड़े भ्रम और डर को दूर करने के लिए।

संक्रमित लोगों के प्रति भेदभाव मिटाने के लिए।

उन लोगों को याद करने के लिए जो इस बीमारी के कारण दुनिया से जा चुके हैं।

बीमारी की रोकथाम और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए।

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एचआईवी और एड्स क्या है?

HIV (Human Immunodeficiency Virus) एक वायरस है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है।

AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) HIV का आखिरी और गंभीर चरण है, जिसमें शरीर किसी भी संक्रमण से नहीं लड़ पाता।

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वर्ल्ड एड्स डे का प्रतीक

लाल रिबन (Red Ribbon) इसका प्रतीक है, जो एड्स पीड़ितों के समर्थन और जागरूकता को दर्शाता है।

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2025 का थीम (संभावित या प्रचलित थीम)

प्रत्येक वर्ष एक थीम होती है – जैसे:
“Let Communities Lead” (समुदायों को नेतृत्व करने दें) – यह हाल के वर्षों का प्रमुख संदेश रहा है।

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वर्ल्ड एड्स डे के अवसर पर स्कूलों में होने वाली गतिविधियाँ

जागरूकता रैली

पोस्टर मेकिंग

निबंध लेखन

रेड रिबन कैंपेन

क्विज़ प्रतियोगिता

डॉक्यूमेंट्री / जानकारी सत्र


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बच्चों को क्या सीख मिलती है?

बीमारी के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी

सामाजिक भेदभाव से बचना

स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना

इंसानियत और सहानुभूति की भावना

सुरक्षित जीवनशैली के बारे में जागरूकता

Friday, November 28, 2025

Monday, November 24, 2025

 Constitution Day (Samvidhan Divas) – 26 November 

 📖 संविधान दिवस (26 नवम्बर)

 परिचय

संविधान दिवस, जिसे संविधान दिवस या सम्विधान दिवस भी कहा जाता है, भारत में हर वर्ष 26 नवम्बर को मनाया जाता है। यह दिन 1949 में संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को अपनाने का प्रतीक है। संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, जो शासन व्यवस्था को दिशा देता है, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और प्रत्येक व्यक्ति के कर्तव्यों को निर्धारित करता है।

भारत सरकार ने 2015 में 26 नवम्बर को आधिकारिक रूप से संविधान दिवस घोषित किया, ताकि संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की दूरदृष्टि को सम्मान दिया जा सके और नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके।

संविधान का इतिहास

  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1947 में भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में शासन करने के लिए एक ढाँचे की आवश्यकता थी।

  • संविधान सभा का गठन किया गया, जिसमें 299 सदस्य थे।

  • संविधान निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे, जिन्होंने संविधान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • संविधान को 26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया और यह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ, जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।

  • भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें ब्रिटिश संसदीय प्रणाली, अमेरिकी अधिकार विधेयक और आयरिश नीति निर्देशक सिद्धांतों जैसी कई देशों की विशेषताओं को शामिल किया गया है।

भारतीय संविधान की विशेषताएँ

  • प्रस्तावना (Preamble): भारत को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करती है।

  • मौलिक अधिकार (Fundamental Rights): समानता, स्वतंत्रता और भेदभाव से सुरक्षा की गारंटी देते हैं।

  • राज्य के नीति निर्देशक तत्व (Directive Principles): सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार को दिशा देते हैं।

  • मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties): नागरिकों की जिम्मेदारियाँ, जैसे राष्ट्रीय मूल्यों का पालन करना।

  • संघीय ढाँचा (Federal Structure): केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन।

  • स्वतंत्र न्यायपालिका (Independent Judiciary): न्याय सुनिश्चित करती है और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करती है।

संविधान दिवस का उत्सव

भारत में संविधान दिवस बड़े उत्साह से मनाया जाता है:

  • राष्ट्रीय स्तर पर: संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति के नेतृत्व में समारोह होता है। प्रस्तावना का वाचन किया जाता है और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा होती है।

  • विद्यालय और महाविद्यालय: छात्र वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, निबंध प्रतियोगिता और प्रस्तावना का सामूहिक वाचन करते हैं।

  • सरकारी कार्यालय: कर्मचारी संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की शपथ लेते हैं।

  • जन जागरूकता: अभियान, संगोष्ठियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान फैलाया जाता है।

छात्रों की भूमिका

छात्र संविधान की भावना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

  • दैनिक जीवन में विविधता और समानता का सम्मान करें।

  • नागरिकों के रूप में अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहें।

  • विद्यालय चुनावों और चर्चाओं जैसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें।

  • अपने साथियों और परिवार में संवैधानिक मूल्यों का प्रचार करें।

संविधान दिवस का महत्व

  • नागरिकों को स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं के बलिदानों की याद दिलाता है।

  • लोकतांत्रिक मूल्यों और विविधता में एकता को मजबूत करता है।

  • लोगों को कानून का सम्मान करने और अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।

  • आने वाली पीढ़ियों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।

संविधान दिवस केवल इतिहास की स्मृति नहीं है—यह हमारे नेताओं की दूरदृष्टि और नागरिकों की जिम्मेदारी की याद दिलाता है। संविधान भारत के लोकतंत्र की रीढ़ है, जो सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्रता और समानता का आनंद ले। संविधान दिवस मनाकर हम डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा को सम्मान देते हैं और उन मूल्यों को बनाए रखने की प्रतिज्ञा करते हैं जो भारत को एक मजबूत और जीवंत राष्ट्र बनाते हैं।

📖 Constitution Day (Samvidhan Divas) – 26 November 

 Introduction 

Constitution Day, also known as Samvidhan Divas, is celebrated every year on 26 November in India. This day marks the adoption of the Constitution of India in 1949 by the Constituent Assembly. The Constitution is the supreme law of the land, guiding the nation’s governance, protecting citizens’ rights, and laying down the duties of every individual. The Government of India officially declared 26 November as Constitution Day in 2015, to honor the vision of Dr. B.R. Ambedkar, the chief architect of the Constitution, and to spread awareness about constitutional values among citizens. 

 History of the Constitution 

After independence in 1947, India needed a framework to govern itself as a democratic republic. The Constituent Assembly, consisting of 299 members, was formed to draft the Constitution. The drafting committee was chaired by Dr. B.R. Ambedkar, who played a crucial role in shaping the document. The Constitution was adopted on 26 November 1949 and came into effect on 26 January 1950, celebrated as Republic Day. The Indian Constitution is the longest written constitution in the world, combining features from many countries, including the British parliamentary system, American Bill of Rights, and Irish Directive Principles.

 Features of the Indian Constitution 

Preamble – Declares India as a Sovereign, Socialist, Secular, Democratic Republic. Fundamental Rights – Guarantee equality, freedom, and protection against discrimination. Directive Principles of State Policy – Guidelines for government policies to ensure social and economic justice. Fundamental Duties – Responsibilities of citizens to uphold national values. Federal Structure – Division of powers between the Union and States. Independent Judiciary – Ensures justice and protects constitutional values. 🎉 Celebration of Constitution Day Constitution Day is celebrated across India with great enthusiasm: National Level: The President of India leads celebrations in the Central Hall of Parliament. The Preamble is read aloud, and discussions on constitutional values are held. Schools and Colleges: Students participate in debates, quizzes, essay competitions, and mass readings of the Preamble. Government Offices: Employees take pledges to uphold constitutional values. Public Awareness: Campaigns, seminars, and cultural programs spread knowledge about rights and duties.

 Role of Students 

Students play a vital role in keeping the spirit of the Constitution alive: Respect diversity and equality in everyday life. Be aware of their rights and duties as citizens. Participate in democratic processes like school elections and discussions. Spread awareness about constitutional values among peers and family.

 Importance of Constitution Day

 Reminds citizens of the sacrifices made by freedom fighters and leaders. Strengthens democratic values and unity in diversity. Encourages people to respect the law and fulfill their duties. Inspires future generations to uphold justice, liberty, equality, and fraternity. 

 Conclusion

 Constitution Day is not just a commemoration of history—it is a reminder of the vision of our leaders and the responsibility of citizens. The Constitution is the backbone of India’s democracy, ensuring that every individual enjoys freedom and equality. By celebrating Constitution Day, we honor Dr. B.R. Ambedkar and the Constituent Assembly, and we pledge to uphold the values that make India a strong and vibrant nation.




Saturday, November 15, 2025

BIRSA MUNDA JAYANTI


बिरसा मुंडा का जीवन परिचय (birsa Munda Biography in Hindi)*

बिरसा मुंडा एक प्रसिद्ध भारतीय व्यक्तित्व हैं, जो अपने समाजसेवी कार्यों, आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए किए गए योगदान, तथा अपने प्रेरणादायक जीवन के लिए जानी जाती हैं। वे झारखंड राज्य से संबंधित हैं और आदिवासी समाज की प्रतिनिधि के रूप में उभरती हुई नेता मानी जाती हैं

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###🟣 *प्रारंभिक जीवन और जन्म*

बिरसा मुंडा का जन्म झारखंड राज्य के एक आदिवासी परिवार में हुआ। उनका परिवार सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध रहा है। उन्होंने बचपन से ही अपने समाज के लोगों की कठिनाइयों को नज़दीक से देखा, जिससे उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा मिली।

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### 🟣 *शिक्षा*

बिरसा मुंडाने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए झारखंड के प्रतिष्ठित संस्थानों से अध्ययन किया। वे हमेशा शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण साधन मानती हैं।

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### 🟣 *सामाजिक कार्य*

बिरसा मुंडा ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा समाज सेवा को समर्पित किया है। वे विशेष रूप से *महिलाओं की शिक्षा, **स्वास्थ्य, और **आदिवासी अधिकारों* से जुड़े मुद्दों पर काम करती हैं।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को *शिक्षा के महत्व, **महिला सशक्तिकरण, और **पर्यावरण संरक्षण* के प्रति जागरूक किया है।

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### 🟣 *प्रेरणा स्रोत*

बिरसा मुंडा को महान स्वतंत्रता सेनानी *भगवान बिरसा मुंडा* से गहरा लगाव और प्रेरणा मिली है। वे बिरसा मुंडा के आदर्शों — “जल, जंगल, ज़मीन” की रक्षा — को अपने जीवन में अपनाए हुए हैं।

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### 🟣 *उपलब्धियाँ*

* आदिवासी समाज के उत्थान हेतु कई अभियानों का नेतृत्व किया।


* महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों की स्थापना की।


* शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी कई योजनाओं में सक्रिय योगदान दिया।




Thursday, November 13, 2025

CHILDREN'S DAY

जवाहरलाल नेहरू और बाल दिवस

भारत में बाल दिवस हर साल 14 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर मनाया जाता है। नेहरू जी बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। बच्चे उन्हें प्यार से चाचा नेहरू कहते थे।

उनका मानना था कि बच्चे देश का भविष्य हैं, इसलिए उनका सही पालन-पोषण, शिक्षा और संस्कार बेहद ज़रूरी है।
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जवाहरलाल नेहरू का बच्चों के प्रति प्रेम

वे बच्चों को देश का निर्माता मानते थे।

वे कहते थे, “आज के बच्चे कल का भविष्य हैं।”

बच्चों के विकास के लिए उन्होंने स्कूलों, वैज्ञानिक संस्थानों और बाल कल्याण योजनाओं को बढ़ावा दिया।

वे हमेशा बच्चों के साथ समय बिताने, उनसे बात करने और उनकी समस्याएँ सुनने में खुशी महसूस करते थे।

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बाल दिवस क्यों मनाया जाता है?

नेहरू जी की जयंती को बाल दिवस के रूप में मनाकर हम उनका बच्चों के प्रति प्रेम याद करते हैं।

इस दिन बच्चों के लिए स्कूलों में विशेष कार्यक्रम, खेल, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

इस अवसर पर बच्चों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी जागरूकता फैलाई जाती है।

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निष्कर्ष

बाल दिवस हमें यह संदेश देता है कि बच्चों की मुस्कान और उनके सपनों की रक्षा करना हर समाज और देश की जिम्मेदारी है। चाचा नेहरू की सोच आज भी हमें प्रेरित करती है कि हम हर बच्चे को प्यार, सम्मान और बेहतर भविष्य देने का प्रयास करें।


 

Monday, November 10, 2025

National Education Day Quiz | राष्ट्रीय शिक्षा दिवस प्रश्नोत्तर 

Let’s celebrate the birth anniversary of Maulana Abul Kalam Azad, India’s first Education Minister.

इस क्विज़ का उद्देश्य शिक्षा के महत्व को समझना और राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के बारे में ज्ञान बढ़ाना है।

Questions:


1️⃣ When is National Education Day celebrated?

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस कब मनाया जाता है?

5 September

14 November

11 November ✅

26 January


2️⃣ National Education Day is celebrated on whose birth anniversary?

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस किसकी जयंती के रूप में मनाया जाता है?

Dr. Sarvepalli Radhakrishnan

Maulana Abul Kalam Azad ✅

Mahatma Gandhi

Rabindranath Tagore


3️⃣ What was Maulana Abul Kalam Azad the first of in India?

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के पहले क्या थे?

President

Prime Minister

Education Minister ✅

Vice President


4️⃣ Where was Maulana Abul Kalam Azad born?

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म कहाँ हुआ था?

Delhi

Kolkata

Mecca, Saudi Arabia ✅

Mumbai


5️⃣ In which year was Maulana Abul Kalam Azad born?

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म किस वर्ष हुआ था?

1878

1888 ✅

1898

1908


6️⃣ Which institutions did he establish as the first Education Minister of India?

भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने किन संस्थानों की स्थापना की?

UGC and IITs ✅

AIIMS and ISRO

IGNOU and CBSE

DRDO and NIT


7️⃣ What is the main purpose of celebrating National Education Day?

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

To remember freedom fighters

To promote education and awareness ✅

To celebrate Teachers’ Day

To start new schools


8️⃣ What is Maulana Azad’s famous quote about education?

मौलाना आज़ाद का प्रसिद्ध उद्धरण क्या है?

“Education is the tool that makes a person useful for society and the nation.” ✅

“Work is worship.”

“Unity in diversity.”

“Truth alone triumphs.”


9️⃣ Which activities are conducted in schools on National Education Day?

विद्यालयों में इस दिन कौन-कौन सी गतिविधियाँ होती हैं?

Debates, essays, speeches, cultural programs ✅

Sports and games

Annual function

Picnic


10️⃣ When did Maulana Abul Kalam Azad pass away?

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का निधन कब हुआ?

1948

1958 ✅

1968

1978


11️⃣ What is the full form of IIT?

IIT का पूर्ण रूप क्या है?

Indian Institute of Teaching

Indian Institute of Technology ✅

Indian International Training

Indian Industrial Trust


12️⃣ What is the full form of UGC?

UGC का पूर्ण रूप क्या है?

University Grants Commission ✅

Unified Government Council

Union Grant Cell

University General Committee


13️⃣ Who said, “Education is the soul of a nation”?

“शिक्षा ही राष्ट्र की आत्मा है” — यह किसने कहा?

Swami Vivekananda

Maulana Abul Kalam Azad ✅

Rabindranath Tagore

Dr. A.P.J. Abdul Kalam


            • ✅ Quiz End Message:


Thank you for participating!

“Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.”

— Nelson Mandela


राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 



राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 
प्रस्तावना:
भारत में हर वर्ष 11 नवम्बर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस बड़े सम्मान और गर्व के साथ मनाया जाता है। यह दिवस देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत में आधुनिक शिक्षा प्रणाली की नींव रखी थी। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों में शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना और सभी को शिक्षित करने की प्रेरणा देना है।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय और योगदान:
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 11 नवम्बर 1888 को सऊदी अरब के मक्का शहर में हुआ था। उनका पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अहमद आज़ाद था। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, पत्रकार और शिक्षाविद थे। भारत की आज़ादी के बाद जब वे देश के पहले शिक्षा मंत्री बने, तो उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई ऐतिहासिक परिवर्तन किए।
उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs), सांस्कृतिक और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों की स्थापना की। उन्होंने तकनीकी, उच्च और प्राथमिक शिक्षा के प्रसार पर विशेष बल दिया।
उनका मानना था कि –

> “शिक्षा ही वह साधन है जो मनुष्य को समाज और देश के लिए उपयोगी बनाती है।”


राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का उद्देश्य:
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने का उद्देश्य केवल मौलाना आज़ाद को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि शिक्षा के महत्व को हर व्यक्ति तक पहुँचाना भी है। इस दिन देश भर के विद्यालयों और कॉलेजों में वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन, भाषण, और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़े।

शिक्षा का महत्व:
शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे मूल्यवान खज़ाना है। यह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। एक शिक्षित व्यक्ति समाज में समानता, भाईचारे और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
शिक्षा से ही व्यक्ति में आत्मविश्वास, सोचने की क्षमता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण आता है।

> “बिना शिक्षा के व्यक्ति ऐसे है जैसे बिना दीपक का घर — अंधकारमय और दिशाहीन।”

उपसंहार:
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस हमें यह सिखाता है कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। हमें मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के आदर्शों को अपनाकर शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना चाहिए।
जब हर बच्चा शिक्षित होगा, तभी भारत वास्तव में एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनेगा।

> “शिक्षा ही राष्ट्र की आत्मा है — और उसका प्रसार ही सच्चा राष्ट्र निर्माण है।”

Introduction:
Every year on November 11, National Education Day is celebrated in India with great respect and pride. This day is observed to commemorate the birth anniversary of Maulana Abul Kalam Azad, the first Education Minister of independent India. He laid the foundation of the modern education system in the country. The purpose of celebrating this day is to spread awareness about the importance of education and to inspire everyone to become educated.

Life and Contributions of Maulana Abul Kalam Azad:
Maulana Abul Kalam Azad was born on November 11, 1888, in Makkah, Saudi Arabia. His full name was Abul Kalam Ghulam Muhiyuddin Ahmad Azad. He was a great freedom fighter, thinker, journalist, and educationist. After India’s independence, when he became th…

Monday, November 3, 2025

 

GURU NANAK JAYANTI



                                              




🌼 गुरु नानक देव जी का जीवन परिचय

नाम: गुरु नानक देव जी
जन्म: 15 अप्रैल 1469
जन्म स्थान: तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान)
पिता: मेहता कालू
माता: माता तृप्ता
पत्नी: माता सुलखनी
पुत्र: श्रीचंद और लखमीदास
परलोक गमन: 22 सितंबर 1539 (करतारपुर, पंजाब)



🌟 बचपन और शिक्षा

गुरु नानक देव जी बचपन से ही बहुत तेजस्वी और धार्मिक प्रवृत्ति के थे। जब वे छोटे थे, तब ही उनमें ईश्वर के प्रति गहरी श्रद्धा और मानवता के प्रति करुणा दिखाई देती थी।
गुरु नानक बचपन में अक्सर सवाल पूछा करते थे —
“अगर भगवान एक है, तो लोग इतने धर्मों में क्यों बँटे हैं?”

वे स्कूल गए तो अध्यापक ने उन्हें वर्णमाला सिखाई। पर नानक देव जी ने हर अक्षर को ईश्वर के नाम और गुणों से जोड़कर समझाया। इससे उनके अध्यापक भी चकित रह गए।



💫 महत्वपूर्ण घटनाएँ

🧵 “सच्चा सौदा”

एक बार उनके पिता ने उन्हें व्यापार करने के लिए कुछ पैसे दिए। नानक देव जी ने उन पैसों से भूखे साधुओं को भोजन करा दिया और कहा —

“यह सच्चा सौदा था।”
क्योंकि दूसरों की सेवा से बढ़कर कोई व्यापार नहीं।

🌊 “गायब होना और ईश्वर का संदेश”

एक बार वे नदी में स्नान करने गए और तीन दिन तक नहीं लौटे। लोग समझे कि वे डूब गए। लेकिन तीन दिन बाद वे लौटे और बोले —

“ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान।”
उन्होंने बताया कि उन्हें ईश्वर का संदेश मिला है — सब धर्म एक ही परमात्मा तक पहुँचने के मार्ग हैं।



🚶‍♂️ चार उदासियाँ (यात्राएँ)

गुरु नानक देव जी ने चारों दिशाओं में यात्राएँ कीं — भारत, तिब्बत, श्रीलंका, अरब और मक्का-मदीना तक।
उन्होंने हर जगह जाकर लोगों को सिखाया कि —

  • भगवान एक है।

  • सभी मनुष्य समान हैं।

  • जाति-पाति, ऊँच-नीच सब व्यर्थ है।

  • ईमानदारी और परिश्रम से जीवन बिताना चाहिए।



🕊️ मुख्य शिक्षाएँ

  1. नाम जपना – हर समय ईश्वर का नाम स्मरण करो।

  2. कीरत करनी – मेहनत और ईमानदारी से जीवनयापन करो।

  3. वंड छकना – अपनी कमाई में से जरूरतमंदों के साथ बाँटो।

उनका संदेश था —

“एक ओंकार सतनाम।”
अर्थात्, ईश्वर एक है और वही सत्य है।


🌺 अंतिम समय और विरासत

गुरु नानक देव जी ने अपने शिष्य भाई लहणा जी को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जो बाद में गुरु अंगद देव जी कहलाए।
उन्होंने अपने जीवन से सिखाया कि सच्चा धर्म सेवा, प्रेम और समानता में है।

उनकी शिक्षाएँ आज भी गुरु ग्रंथ साहिब में जीवित हैं, और गुरु नानक जयंती के दिन श्रद्धापूर्वक उनका जन्म दिवस मनाया जाता है।